जिन -जिन हाथों ने छुआ मुझे
क्या कहूँ
किन -किन हाथों ने छुआ मुझे.
काले-उजले
रूखे -मांसल
कोमल -कर्मठ
नन्हे -युवा
प्रौढ़ और बूढे
स्त्री -पुरूष नपुंसक ।
जिन -जिन हाथों ने छुआ मुझे ,
क्या कहूँ ........
किन -किन हाथों ने छुआ मुझे ।
हर स्पर्श का है एक इतिहास ।
हर स्पर्श की है एक कहानी |
हर स्पर्श की है एक कविता |
और सच कहू तो ....
हर स्पर्श के अनुभव का ,
एक चित्र भी खिंचा है मेरे मन पर पर |
ये छूने भर के अनुभव ,
इतिहास ,कहानी ,कविता और चित्र ...
केवल मेरे हैं |
ये मुझे रुलाते -हँसाते
गुदगुदाते ,धीरज बंधाते ,
मन रमाते,वितृष्णा जगाते हाथ ,
उन सबके होकर भी केवल मेरे हैं |
जिन -जिन हाथों ने छुआ मुझे ,
क्या कहूँ .....किन -किन हाथों ने छुआ मुझे |
अच्छा है ....छूने से पड़ते हैं जो निशान ,
देह पर नही पड़ते |
बस...मन पर पड़ते है ,
और दूसरे का मन देख पायें ....
ऐसी आँखे नही बनी अब तक |
वरना क्या जाने मैं कैसी दिखती ?
विविधवर्णी .....
क्योंकि हर छुअन का अपना अलग रंग है
और अपना अलग निशान |
जिन -जिन हाथों ने छुआ मुझे
क्या कहूँ ...किन किन हाथों ने छुआ मुझे |